किन समस्याओं का किया जाता है निदान ?
टीयूआरपी सौम्य तौर पर बीपीएच यानी प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया के कारण उत्पन्न होने वाले मूत्र संबंधी लक्षणों को कम करने में मदद करता है, जिनमें शामिल है :-- बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता होना
- पेशाब को शुरू करने में तकलीफ होना
- लंबे समय तक या फिर धीरे-धीरे पेशाब का आना
- रात को सबसे अधिक बार या फिर लगातार पेशाब को करने की आवश्यकता महसूस होनी
- पेशाब करते समय, पेशाब का रुक जाना या फिर से शुरू हो जाना
- पेशाब करने के बाद भी ऐसा महसूस होना की आपका मूत्राशय अभी भी पूर्ण रूप से खाली नहीं हो पाया है
- किसी कारणवश मूत्राशय में हुआ संक्रमण
- बार-बार मूत्रमार्ग में संक्रमण होना
- गुर्दे और मूत्राशय को किसी कारणवश पहुंची क्षति
- पेशाब पर नियंत्रण करने में असमर्थ होना या फिर पेशाब ही न कर पाना
- मूत्राशय में उत्पन्न पथरी के कारण
- पेशाब के साथ खून का आना
टीयूआरपी ऑपरेशन से संबंधित कुछ जोखिम कारक
- टीयूआरपी सर्जिकल प्रक्रिया करने के बाद आपको कुछ दिनों के लिए पेशाब करने में परेशानी हो सकती है |
- कैथेटर जब आपके शरीर के साथ लंबे समय तक लगा रहता है तो इससे मूत्रमार्ग में संक्रमण होने की संभावना बढ़ सकती है | इसके अलावा टीयूआरपी वाले कुछ पुरुषों में बार-बार मूत्रमार्ग में संक्रमण होने की समस्या हो सकती है |
- संभोग के दौरान जब वीर्य को लिंग से निकलने के बजाए, मूत्राशय से बाहर निकल जाता है, तो यह किसी भी प्रकार के प्रोस्टेट सर्जरी एक सामान्य और दीर्घकालिक प्रभाव होता है | शुष्क संभोग होना कोई हानिकारक स्थिति नहीं है और यह यौन सुख को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करता है | लेकिन यह आपके महिला साथी की गर्भवती संभावना को कम कर सकता है |
- इस ऑपरेशन के बाद पुरुष को इरेक्शन को बनाये रखने में परेशानी हो सकती है | इससे जुड़े जोखिम कारक बहुत कम होते है, लेकिन प्रोस्टेट उपचार के बाद इरेक्टल डिसफंक्शन की समस्या हो सकती है |
- टीयूआरपी सर्जिकल प्रक्रिया के बाद आपको पेशाब को नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है |
- टीयूआरपी ऑपरेशन के दौरान, पुरुषों का खून काफी बह जाता है, जिसकी वजह से उन्हें दान किये गए खून को चढाने की ज़रुरत पड़ जाती है |
- टीयूआरपी ऑपरेशन को करवाने के बाद रक्त में सोडियम की कमी हो जाती है, जिससे हाइपोनेट्रेमिया भी कहा जाता है | दरअसल क्या होता है कि जब सर्जरी किये गए क्षेत्र को धोने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाला तरल पदार्थ शरीर को अधिक अवशोषित कर लेता है, तो इसकी वजह से रक्त में सोडियम की कमी होने लग जाती है |