किडनी को सेहतमंद रखने के लिए पानी पीने के कुछ जरूरी टिप्स
दरअसल, अपनी किडनी को सेहतमंद रखने के लिए आप निम्नलिखित कुछ जरूरी टिप्स को फॉलो कर सकते हैं, जैसे कि- आम तौर पर, जब आपके जीएफआर लेवल जिन को लेवल ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट के नाम से भी जाना जाता है, दरअसल अगर वो आम की तरह ही होते हैं, तो आपके लिए दिन में कम से कम 8 गिलास पानी का सेवन करना काफी होता है। पर, जब आप किडनी में पथरी कि समस्या से पीड़ित होते हैं, तो इसके लिए आपको दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी का सेवन करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, इतना पानी यूरिन को डाइल्यूट करने के लिए महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, इस की सहायता से पेशाब में पाए जाने वाले पथरी के छोटे- छोटे टुकड़ों को डाइल्यूट करके शरीर से बाहर निकालने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त होती है।
- असल में, जब कोई व्यक्ति काफी लंबे वक्त से किडनी से जुड़ी किसी बीमारी से पीड़त होता है और वह इस समस्या में स्टेज 5 तक पहुंच गया होता है, तो इस दौरान उसको पानी का सेवन करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
- आम तौर पर, जो लोग किडनी डायलिसिस जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, दरअसल उनको यूरिन वॉल्यूम के हिसाब से ही पानी का सेवन करना चाहिए।
- दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि कुछ दवाओं का सेवन करते वक्त पानी का ज्यादा सेवन आपको किसी भी तरह के किडनी डैमेज से बचाने में आपकी काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकता है।
रात में कितनी बार पेशाब करना शरीर के लिए बिल्कुल ठीक होता है?
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सामान्य रूप से आप लगभग 6 से 8 घंटे तक बिना पेशाब किए आराम से अपनी नींद को ले सकते हैं। आम तौर पर, जो लोग नॉक्चरिया जैसी समस्या से पीड़ित होते हैं, ऐसे लोग रात में पेशाब करने के लिए उठते हैं। अब आप जानना चाहेंगे, कि आखिर यह नॉक्चरिया किया होता है। दरअसल, नॉक्चरिया एक इस तरह की स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति रात के समय में बार- बार पेशाब करने के लिए अपनी नींद से जागता है। हालांकि, यह समस्या स्लीप साइकिल से जुड़ी एक गड़बड़ी हो सकती है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को दिन में नींद आ सकती है।इस स्थिति के क्या कारण हो सकते हैं?
वैसे तो, इस तरह की स्थिति के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि- बिना इलाज वाला डायबिटीज या फिर जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी समस्या का होना।
- हार्ट फेलियर होना या फिर पैरों में सूजन की समस्या होना।
- नींद की कमी होना।
- डाइयूरेटिक जैसी दवाइयों का सेवन करना
- ब्लैडर से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का होना, या फिर पेशाब में इन्फेक्शन आदि होना।
- रात को सोते वक्त कैफ़ीन या फिर तरल पदार्थ का काफी ज्यादा मात्रा में सेवन करना।